श्री नरोत्तम ठाकुर: प्रेम-भक्ति के मूर्तिमान विग्रह
श्री नरोत्तम ठाकुर: प्रेम-भक्ति के मूर्तिमान विग्रह
यह सत्संग श्री नरोत्तम दास ठाकुर महाशय के पावन आविर्भाव तिथि के उपलक्ष्य में उनके दिव्य जीवन-चरित्र पर केंद्रित है। सद्गुरुदेव बताते हैं कि कैसे श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्री नरोत्तम के जन्म से पूर्व ही उनके आगमन की भविष्यवाणी की और उनके लिए दिव्य प्रेम को पद्मा नदी में धरोहर के रूप में रखा। सत्संग में श्री नरोत्तम के जन्म, पद्मा नदी से प्रेम-प्राप्ति, वृन्दावन गमन, श्री लोकनाथ गोस्वामी से दीक्षा हेतु उनकी अनन्य सेवा, और श्रीनिवास आचार्य एवं श्यामानंद प्रभु के साथ उनके लीला-प्रसंगों का मार्मिक वर्णन है। सद्गुरुदेव ने इस चरित्र के माध्यम से जातिवाद का प्रबल खंडन करते हुए भक्ति की सर्वोपरिता और गुण-कर्म आधारित वर्ण-व्यवस्था के वास्तविक स्वरूप को शास्त्रों के प्रमाणों से सिद्ध किया है। अंततः, गुरु-शिष्य के एकात्म-भाव को श्रीनिवास आचार्य, नरोत्तम ठाकुर और रामचंद्र कविराज के अद्भुत प्रसंगों द्वारा दर्शाया गया है।
📖 आज की शिक्षाएं 📖 आज की विस्तृत शिक्षाएं
- संसार बंधन का कारण नहीं है, वासना बंधन का कारण है।
- स्त्री बंधन का कारण नहीं है, भोगवृत्ति बंधन का कारण है।
- बंधन का कारण भीतर की वृत्ति है, बाहरी वस्तु नहीं।
- जब तक भीतर भोग-वासना है, तभी तक बंधन है।
यह सारांश AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग गुरु सेवा में करके तैयार किया गया है। इसमें त्रुटि हो सकती है। कृपया पूर्ण लाभ के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें।
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