श्री रामाई ठाकुर का दिव्य जीवन चरित्र - माता जाह्नवी की कृपा से गौड़ीय वैष्णव धर्म के महान धारक-वाहक
श्री रामाई ठाकुर का दिव्य जीवन चरित्र - माता जाह्नवी की कृपा से गौड़ीय वैष्णव धर्म के महान धारक-वाहक
इस सत्संग में सद्गुरुदेव श्री रामाई ठाकुर के दिव्य जीवन चरित्र का वर्णन करते हैं। रामाई ठाकुर के प्रपितामह श्री माधवदास (चकारि गोस्वामी) और पितामह श्री वंशीवदनानंद ठाकुर की भक्ति परंपरा का वर्णन है। वंशीवदनानंद ठाकुर ने देहत्याग से पूर्व अपनी पुत्रवधू को आशीर्वाद दिया कि वे उनके पुत्र रूप में पुनः आएंगे। माता जाह्नवी ठाकुरानी ने रामाई ठाकुर को पुत्र रूप में स्वीकार किया और गौड़ीय वैष्णव धर्म के प्रचार हेतु दीक्षित किया। वृंदावन यात्रा में माता ने पाखंडियों का उद्धार किया और ब्रजमंडल में एक मृत बालक को जीवनदान दिया। माता जाह्नवी के कामा में गोपीनाथ विग्रह में विलीन होने के पश्चात रामाई ठाकुर को यमुना स्नान में कानाई-बलाई विग्रह की प्राप्ति हुई।
📖 आज की शिक्षाएं 📖 आज की विस्तृत शिक्षाएं
- महाप्रभु के प्रेम धर्म के प्रमुख प्रचारक
- वैष्णव समाज में वैष्णवाग्रगण्य
- मंजरी भाव उपासना पद्धति के धारक
- माता जाह्नवी ठाकुरानी के पुत्र रूप में स्वीकृत
- मूल नाम: चकारि चट्टोपाध्याय
- दीक्षा नाम: माधवदास / माधव चट्टोपाध्याय
- पत्नी: सुनीता देवी
- पुत्र: वंशीवदनानंद ठाकुर
- जन्म से महाप्रभु के अनन्य प्रेमी
- नवद्वीप में शची माता एवं विष्णुप्रिया माता की सेवा
- विष्णुप्रिया माता से मंत्र दीक्षा प्राप्त
- निवास: फुलिया ग्राम (नवद्वीप से कुछ दूर)
- वंशीवदनानंद ठाकुर के दो पुत्र: चैतन्य (बड़े) एवं निताई (छोटे)
- चैतन्य के पुत्र: रामाई ठाकुर (बड़े) एवं सचिनंदन (छोटे - 10 वर्ष बाद जन्म)
- दोनों पुत्रवधुएं सर्व सद्गुण संपन्ना एवं सेवा में तत्पर
- परिवार का एकमात्र उद्देश्य: हरि कीर्तन एवं हरि भजन
- शरीर रहते-रहते हरिभजन करो
- भगवत चरण में भक्ति प्राप्त करो
- शरीर संबंधी विषयों में आसक्त मत हो
- इस अनित्य संसार को सत्य मत मानो
- शरीर आगंतुक है - मातृ जठर में आरंभ, श्मशान में अंत
- संसार अनित्य है - पहले था नहीं, पीछे रहेगा नहीं
- जीव शरीर से तादात्म्य करके आसक्त होता है
- यह माया मिथ्या एवं स्वप्नवत है
- राजा-रंक, फकीर-धनवान सबको जाना है
- पितामह वंशीवदनानंद ठाकुर का आशीर्वाद - पुत्र रूप में पुनर्जन्म
- पिता: चैतन्य (वंशीवदनानंद के बड़े पुत्र)
- प्रथम पुत्र: रामाई ठाकुर (रामचंद्र)
- द्वितीय पुत्र: सचिनंदन (10 वर्ष बाद जन्म)
- अद्भुत विद्वत्ता
- हरि कथा में पुलकांग चित्त
- अश्रु, कंप, पुलक आदि सात्विक विकार सहज प्रकट
- वसुधा माता = नित्य लीला में रेवती माता (बलराम की पत्नी)
- वसुधा माता के पुत्र: वीरचंद्र प्रभु
- जाह्नवी माता = नित्य लीला में अनंग मंजरी (राधा रानी की बहन)
- जाह्नवी माता की कोई संतान नहीं थी
- सर्व सद्गुण संपन्न
- बाल्यकाल से भक्ति भावना युक्त चित्तवृत्ति
- पुलकांग चित्त - हरि कथा में सहज प्रभावित
- अष्ट सात्विक विकार: अश्रु, कंप, पुलक, स्वेद, वैवर्ण्य आदि
- समस्त शास्त्रों में पारदर्शिता
- वेद-वेदांत का अध्ययन
- समस्त पुराणों का अध्ययन
- अल्प समय में शास्त्र पारंगत
- विद्वत्ता के मूर्तिमंत स्वरूप
- गौरमंडल भूमि भ्रमण
- जगन्नाथपुरी - महाप्रभु की लीला स्थली दर्शन
- नवद्वीप आगमन
- श्रीखंड आदि तीर्थ परिभ्रमण
- जंगल मार्ग में पाखंडियों से भेंट
- माता के दर्शन से डाकुओं का हृदय परिवर्तन
- दीक्षा प्रदान कर सबका उद्धार
- बनारस (काशी) आगमन - काशी विश्वनाथ दर्शन
- वृंदावन पहुंचना
- शांत एवं दिव्य परिवेश
- गाड़ी-बाड़ी का कोलाहल रहित
- केशी घाट से मथुरा तक वन भूमि
- यमुना से छाटीकरा तक जंगल
- दिव्य लीला स्थलियां
- महाप्रभु - जगन्नाथपुरी में जगन्नाथ जी में विलीन
- नित्यानंद प्रभु - खरधाम में श्यामसुंदर विग्रह में विलीन
- भगवती तनु होने के कारण कोई समाधि नहीं - विलीन हो गए
- अद्वैत आचार्य प्रभु - बाबला में मदनगोपाल में विलीन
- अभिराम ठाकुर - खानाकुल कृष्णनगर में कृष्ण विग्रह बनकर विलीन
- भगवती तनु होने से कोई समाधि नहीं - सब विलीन हो गए
- मध्य में: श्री गोपीनाथ जी
- दक्षिण (दाहिने) भाग में: श्री राधा रानी
- वाम (बाएं) भाग में: श्री अनंग मंजरी (माता जाह्नवी ठाकुरानी)
- कानाई = कृष्ण विग्रह
- बलाई = बलराम विग्रह
- माता के विरह में सान्त्वना स्वरूप
- दाहिने भाग में - श्री राधारानी
- बाएँ भाग में - अनंग मंजरी (माता जाह्नवी ठाकुरानी)
- मध्य में - श्री गोपीनाथ (नित्यानंद प्रभु)
- मातृहारा = सर्वहारा (माता के बिना सब शून्य)
- कोटि मातृ स्नेह से भी अधिक था माता जाह्नवी का स्नेह
- माता की कृपा से ही भगवत् भावना में पुष्टि हुई
- श्री रूप गोस्वामी
- श्री सनातन गोस्वामी
- श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी
- सभी एक-एक करके नित्य धाम पधारे
- बाघना = बाघ नहीं (बाघ + ना)
- शेर को हरिनाम दीक्षा के बाद नामकरण हुआ
- आज भी यह स्थान इसी नाम से प्रसिद्ध है
- 11,000 नेड़ा-नेड़ी की सृष्टि
- रात 12 बजे आगमन का आदेश
- असम्भव वस्तुओं की माँग करने का निर्देश
- उद्देश्य: भाई की सिद्धि की परीक्षा
- बेमौसम आम (ठंडी में आम की माँग)
- गरम-गरम रसोई (रात 12 बजे जंगल में)
- 11,000 के लिए पंगत व्यवस्था
- रसगुल्ला, गुलाब जामुन आदि पकवान
- निरभिमान भाव से भगवत् भजन करें
- स्वयं को सदा हीन एवं अयोग्य मानें
- दूसरों को प्रभु मानकर सम्मान करें
- चमत्कारों को सिद्धि न समझें
- अपने को बड़ा न मानें
- तांत्रिक उपपंथों को शुद्ध भक्ति न समझें
- अशुद्धाचार वाले मार्गों का अनुसरण न करें
- नेड़ा-नेड़ी
- साईं धर्म
- दरवेश
- कर्त्ताभजा
- कला सन्धी
- जात गोसाई
- इनमें शास्त्रीय वैदिक मार्ग का अभाव है
- वैष्णव सदा विनम्र रहता है, अपना दोष देखता है
- असंभव माँग पर भी भगवान व्यवस्था करते हैं
- यह चमत्कार नहीं, भगवान की प्रतिज्ञा का पालन है
- भगवत् प्रसन्नता को साधन का प्राण केंद्र बनाएँ
- दीन-हीन भाव से शरणागत होकर भजन करें
- योग = अलब्ध वस्तु की प्राप्ति (अप्राप्त को प्राप्त कराना)
- क्षेम = लब्ध वस्तु का संरक्षण (प्राप्त की रक्षा करना)
- दोनों महाप्रभु के प्रेम से पुष्ट
- दोनों अलौकिक शक्ति संपन्न
- दोनों राधा प्रेम प्राप्त करके कृतकृत्य
- दोनों प्रेम धारा के वितरणकर्ता
- पद्मासन में बैठकर
- कृष्णकर्णामृत श्लोक का उच्चारण करते हुए
- अश्रुधारा से वक्षस्थल अभिषिक्त
- भगवत् चिंतन में तल्लीनता के साथ
- सज्ञान देह त्याग
- आविर्भाव तिथि - माघी पूर्णिमा
- तिरोभाव तिथि - कृष्ण नवमी (11 फरवरी)
- आविर्भाव तिथि: माघी पूर्णिमा (संपन्न)
- तिरोभाव तिथि: कृष्ण नवमी (11 फरवरी)
सत्संग के अनुसार, वंशीवदनानंद ठाकुर ने वचन दिया था कि वे अपनी पुत्रवधू के पुत्र के रूप में पुनर्जन्म लेंगे, जो बाद में श्री रामाई ठाकुर के रूप में प्रकट हुए।
सत्संग में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि माता जाह्नवी ने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रजमंडल में एक मृत बालक को पुनः जीवित कर दिया था।
सत्संग के अनुसार, माता जाह्नवी के कामा में गोपीनाथ विग्रह में विलीन होने के बाद, रामाई ठाकुर को यमुना स्नान के दौरान कानाई-बलाई विग्रह मिले।
सारांश के अनुसार, माता जाह्नवी ठाकुरानी ने रामाई ठाकुर को अपने पुत्र के रूप में स्वीकार किया और उन्हें धर्म प्रचार के लिए दीक्षित किया।
सत्संग के सारांश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि रामाई ठाकुर के प्रपितामह श्री माधवदास (चकारि गोस्वामी) थे।
सत्संग के अनुसार, श्री वंशीवदनानंद ठाकुर रामाई ठाकुर के पितामह (grandfather) थे, पिता नहीं।
सत्संग के सारांश में बताया गया है कि माता जाह्नवी कामा में गोपीनाथ विग्रह में विलीन हुई थीं, यमुना नदी में नहीं।
सारांश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि माता जाह्नवी के विग्रह में विलीन होने के बाद रामाई ठाकुर को यमुना स्नान में कानाई-बलाई विग्रह मिले।
✨ विशेष उल्लेख
- प्रपितामह: श्री माधवदास (चकारि गोस्वामी / माधव चट्टोपाध्याय)
- प्रपितामही: श्रीमती सुनीता देवी
- पितामह: श्री वंशीवदनानंद ठाकुर (माधवदास के पुत्र)
- पिता: श्री चैतन्य (वंशीवदनानंद ठाकुर के बड़े पुत्र)
- चाचा: श्री निताई (वंशीवदनानंद ठाकुर के छोटे पुत्र)
- श्री रामाई ठाकुर (चैतन्य के प्रथम पुत्र)
- छोटे भाई: श्री सचिनंदन (रामाई से 10 वर्ष छोटे)
- वसुधा माता = नित्य लीला में रेवती माता (बलराम की पत्नी)
- वसुधा माता के पुत्र: श्री वीरचंद्र प्रभु
- जाह्नवी माता = नित्य लीला में अनंग मंजरी (राधा रानी की बहन)
- जाह्नवी माता की कोई संतान नहीं - रामाई ठाकुर को पुत्र रूप में स्वीकार किया
- श्री चैतन्य महाप्रभु - जगन्नाथपुरी में जगन्नाथ जी में विलीन
- श्री नित्यानंद प्रभु - खरधाम में श्यामसुंदर विग्रह में विलीन
- श्री अद्वैत आचार्य प्रभु - बाबला में मदनगोपाल विग्रह में विलीन
- श्री अभिराम ठाकुर - खानाकुल कृष्णनगर में कृष्ण विग्रह बनकर विलीन
- माता जाह्नवी ठाकुरानी - कामा में गोपीनाथ विग्रह में विलीन
यह सारांश AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग गुरु सेवा में करके तैयार किया गया है। इसमें त्रुटि हो सकती है। कृपया पूर्ण लाभ के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें।
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