गृहस्थ में वैराग्य: वासना-त्याग का विज्ञान
संसार में रहते हुए परमार्थ-सिद्धि का मार्ग: संग-दोष, संस्कार और मन के एकांत का गहन विश्लेषण
यह सत्संग माधुर्य लीला के सर्वोच्च रस से आरंभ होकर साधना के वास्तविक अर्थ को उजागर करता है। सद्गुरुदेव समझाते हैं कि सच्चा त्याग घर का नहीं, बल्कि मन में स्थित भोग-वासना का है। जन्म-जन्मांतर के संस्कारों और संग-दोष के खतरों से सावधान करते हुए, वे गृहस्थ जीवन में रहकर भी अनासक्त भाव से भजन करने का व्यावहारिक मार्ग दिखाते हैं। सत्संग का सार 'मन का एकांत' है, जो भौतिक एकांत से श्रेष्ठ है। अंत में, युवाओं के विवाह, पूर्व के पापों से मुक्ति और सच्चे गुरु की पहचान जैसे समसामयिक प्रश्नों का गहन समाधान प्रस्तुत किया गया है, जो साधक को भक्ति-पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
📖 आज की शिक्षाएं 📖 आज की विस्तृत शिक्षाएं
- बाहरी एकांत (जंगल/निर्जन स्थान)
- गृह एकांत (घर में अलग कक्ष)
- मानसिक एकांत (मन की अनासक्ति - सर्वोत्तम)
यह सारांश AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग गुरु सेवा में करके तैयार किया गया है। इसमें त्रुटि हो सकती है। कृपया पूर्ण लाभ के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें।
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