माया का अभिमान और कृपा का अवलंबन
माया का अभिमान और कृपा का अवलंबन
इस सत्संग में सद्गुरुदेव ने भजन की सफलता के लिए एकमात्र साधन 'कृपा' को स्थापित किया है। श्री नारद मुनि के पूर्व जन्म और बाद के जीवन के दृष्टांतों के माध्यम से, यह समझाया गया है कि भजन में मन न लगने का मूल कारण 'प्रयोजन बोध' का अभाव है। सद्गुरुदेव ने माया पर विजय पाने के अहंकार के खतरे को नारद जी की कथा से उजागर किया। सत्संग का उत्तरार्ध दिव्य वृंदावन की अलौकिक लीलाओं, प्रेम की 7 अवस्थाओं, सखी-भाव के 5 भेदों और 'परस्पर सुख संवर्धन' की गोपनीय लीला का वर्णन करता है। अंत में, तिलक के आध्यात्मिक रहस्य को 'हरि मंदिर' के रूप में समझाकर सनातन धर्म की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला गया है।
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मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥
mām eva ye prapadyante māyām etāṁ taranti te ||
कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ॥
kaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśyati ||
- 1. स्नेह (Sneha)
- 2. मान (Man)
- 3. प्रणय (Pranaya)
- 4. राग (Rag)
- 5. अनुराग (Anurag)
- 6. भाव (Bhav)
- 7. महाभाव (Mahabhav) - केवल दिव्य देह में संभव
- 1. सखी (Sadharan Sakhi): ये 'कृष्ण-स्नेहाधिका' होती हैं। यद्यपि ये राधारानी की मित्र हैं, लेकिन प्रेम-कलह (Love Squabbles) के दौरान ये कृष्ण का पक्ष लेती हैं। (जैसे: धनष्ठा)।
- 2. प्रिय सखी (Priya Sakhi): ये 'सम-स्नेहा' होती हैं (राधा-कृष्ण से समान प्रेम)। ये झगड़ों में किसी का पक्ष नहीं लेतीं; या तो चुप रहती हैं या वहां से हट जाती हैं।
- 3. प्रिय नर्म सखी (Priya Narm Sakhi): ये भी 'सम-स्नेहा' हैं लेकिन अत्यंत अंतरंग हैं। प्रेम-कलह में ये राधारानी का पक्ष लेती हैं। अष्ट सखियाँ (ललिता, विशाखा, चित्रा आदि) इसी श्रेणी में आती हैं।
- 4. प्राण सखी (Pran Sakhi): ये 'राधा-स्नेहाधिका' हैं। ये आठ मुख्य मंजरियां हैं (जैसे रूप मंजरी, रति मंजरी, विलास मंजरी)। इनके लिए राधारानी ही सर्वस्व हैं और ये नित्य गोलोक में उनकी सेवा करती हैं।
- 5. नित्य सखी (Nitya Sakhi): ये वे जीवात्माएं हैं जिन्होंने साधन-भजन करके राधारानी की कृपा से 'मंजरी स्वरूप' प्राप्त किया है। ये सखियों की तरह बराबरी का भाव नहीं रखतीं, बल्कि खुद को राधारानी की 'दासी' मानती हैं और केवल उनके सुख के लिए जीती हैं।
- ललाट (Forehead): ॐ केशवाय नमः
- उदर (Belly): ॐ नारायणाय नमः
- वक्ष (Chest): ॐ माधवाय नमः
- कण्ठ (Throat): ॐ गोविन्दाय नमः
- दाहिना उदर: ॐ विष्णवे नमः
- दाहिना बाहु: ॐ मधुसूदनाय नमः
- दाहिना कंधा: ॐ त्रिविक्रमाय नमः
- बायां उदर: ॐ वामनाय नमः
- बायां बाहु: ॐ श्रीधराय नमः
- बायां कंधा: ॐ हृषीकेशाय नमः
- पीठ (ऊपर/नीचे): ॐ पद्मनाभाय नमः , ॐ दामोदराय नमः
- मस्तिष्क: ॐ वासुदेवाय नमः (वासुदेवाय नमो नमः)
यह सारांश AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग गुरु सेवा में करके तैयार किया गया है। इसमें त्रुटि हो सकती है। कृपया पूर्ण लाभ के लिए पूरा वीडियो अवश्य देखें।
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